पिछले कुछ वर्षों से अनुच्छेद 370 को हटाने की मुहिम ने भारत में तेज़ी पकड़ी और बीजेपी ने इसे अपने शीर्ष एजेंडे में शामिल कर लिया। जिस अंदाज़ में राष्ट्रपति के आदेश के ज़रिए अभी धारा 370 को हटाने का ऐलान हुआ है, उसे निश्चित तौर पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$cat_ID is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 378
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$category_count is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 379
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$category_description is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 380
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$cat_name is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 381
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$category_nicename is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 382
Deprecated: Creation of dynamic property WP_Term::$category_parent is deprecated in /home4/krctib8j/public_html/hindi/wp-includes/category.php on line 383
जुलाई के आखिरी सप्ताह से केन्द्र की सारी चिंताएं ‘जम्मू-कश्मीर’ के प्रति दिख रही थीं। इंटरनेट सेवा को को अवरुद्ध करने, पर्यटकों को कश्मीर से से शीघ्र लौटने, स्कूल-कॉलेज बंद करने, छात्रावास ख़ाली करवाने, राज्य के प्रमुख मार्गों को अवरुद्ध करने, वहाँ के प्रमुख नेताओं को नज़रबन्द करने, वहां सैनिकों की संख्या बढ़ाने जैसे निर्णय और घोषणाओं को समझते हुए इतना तो निश्चित हो गया था कि केन्द्र सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रहित में कुछ-न-कुछ घटनेवाला है; परन्तु क्या होगा, यह देश के लिए समय के गर्भ में था।
यकीनन राज्यसभा में जो भी गृहमंत्री अमित शाह ने कहा और किया यह वाकई बड़ा और बोल्ड कदम है क्योंकि अभी तक मोदी सरकार का रुख यह रहा है कि दो तिहाई बहुमत होने पर धारा 370 को हटाया जाएगा। दूसरी बात यह है कि अभी तक 370 को हटाने के लिए संविधान संशोधन की बात की जाती रही हैं। अप्रैल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को लेकर कहा था कि सालों से बने रहने के चलते अब यह धारा एक स्थायी प्रावधान बन चुकी है, जिससे इसको खत्म करना असंभव हो गया है इसलिए सरकार के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चेलेंज जरूर किया जाएगा।
गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू कश्मीर संशोधन विधेयक 2019 पेश किया और बहस के बाद पास भी हो गया। अनुच्छेद 35 ए और धारा 370 के एक खंड को छोड़कर बाकी को समाप्त कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर को विभाजित कर दिया गया है, अब लद्दाख और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश होंगे। एक विधानसभा रहित और एक विधानसभा सहित। जहां तक 370 का सवाल है तो जब इसे लागू किया गया था, तभी इसे अस्थायी बनाया गया था। दशकों तक किसी भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। अब जब सरकार ने इसे खत्म करने का फैसला किया है, तो तमाम राजनीतिक दल हो हल्ला कर रहे हैं। संविधान और कश्मीरी अवाम की दुहाई दे रहे हैं । पर उन्हें इतना तो सोचना ही चाहिए कि सरकार ने अगर इतना बड़ा फैसला लिया है तो संविधानिक और कानूनी पहलुओं का अध्ययन ज़रूर किया होगा।
अब इस फैसले से कई सारे बदलाव भी देखने को मिलेंगे। जम्मू-कश्मीर पहले राज्य था अब केंद्र शासित प्रदेश हो गया। मुख्यमंत्री का पद समाप्त हो गया। राज्यपाल का पद समाप्त हो गया। दिल्ली की तरह उपराज्यपाल का पद होगा और पुलिस केंद्र सरकार के पास होगी। जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश होगा। लद्दाख अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा। लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी।
कश्मीर के मसले पर सरकार का ये क़दम निश्चित ही ऐतिहासिक और अभूतपूर्व तो है। इससे पहले किसी भी सरकार ने अनुछेद 370 को इस क़दर को हटाने का साहस या दुस्साहस कभी नहीं किया था। एक वजह यह भी थी कि बाक़ी सरकारें संवैधानिक तरीक़े से इससे पार पाने का दिखावा करती थीं जबकि इस सरकार ने संविधान के लूपहोल का फ़ायदा उठाकर ऐसा कर दिया। ठीक वैसे ही जैसे आर्टिकल 35-a को लाया गया था। साल 1954 में नेहरु मंत्रिमंडल ने राष्ट्रपति आदेश के ज़रिए इस आर्टिकल को लागू किया था, अब मोदी मंत्रिमंडल ने भी राष्ट्रपति आदेश के ज़रिए ही इसे हटा दिया है।
लेकिन संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि प्रस्ताव में अनुच्छेद 370 को पूरी तरह से नहीं हटाया गया है। उनके मुताबिक, अनुच्छेद 370 तीन भागों में बंटा हुआ है। जम्मू-कश्मीर के बारे में अस्थाई प्रावधान है जिसको या तो बदला जा सकता है या फिर हटाया जा सकता है।
वहीं अमित शाह के बयान के मुताबिक 370(1) बाकायदा कायम है सिर्फ 370 (2) और (3) को हटाया गया है। दरअसल 370(3) में प्रावधान था कि 370 को बदलने के लिए जम्मू और कश्मीर संविधान सभा की सहमति चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 35A के बारे में यह तय नहीं है कि वह खुद खत्म हो जाएगा या फिर उसके लिए संशोधन करना पड़ेगा।
इस आदेश के बाद राज्य के पुनर्गठन की राह भी अब आसान हो चली है जो संघ की पुरानी चाहत है। लेकिन मूल सवाल वहीं खड़ा है। कश्मीर का जो विलय कुछ तकनीकी ख़ामियों के चलते ‘विशेष’ माना जाता है, क्या वह सारी कमियां सिर्फ़ एक राष्ट्रपति आदेश से दूर हो जायेंगी? इस आदेश से आर्टिकल 35a तो ख़त्म हो जाएगा लेकिन कश्मीर को मिले कई अन्य विशेषाधिकार बरक़रार रहेंगे।
इन तकनीकी पहलुओं के अलवा सबसे अहम बात है घाटी का माहौल। ये किसी से छिपा नहीं है कि घाटी में आम युवा ख़ुद को भारत से उस तरह जुड़ा हुआ नहीं मानता जैसे अन्य भारतीय मानते हैं। उसके मन में भारत के प्रति कई सवाल हैं। ऐसी मनोदशा वाले युवाओं के बीच इस फ़ैसले के क्या परिणाम होंगे, अंदाज़ा लगाना ज़्यादा कठिन नहीं है।


