दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का निगम बोध घाट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, उनके पति रॉबर्ट वाड्रा, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई वरिष्ठ राजनेता मौजूद थे।
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दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ 21 जुलाई, रविवार को किया गया। दिल्ली के निगम बोध घाट पर मौजूद बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
शीला दीक्षित को अंतिम विदाई देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, समेत कई बड़े नेता निगम बोध घाट पर मौजूद थे। इन नेताओं के अलावा शीला के धुर विरोधी रहे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन और पूर्व विधायक भीष्म शर्मा भी निगम बोध घाट पर जाकर शीला दीक्षित को आखिरी विदाई दी।
इस दौरान हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर, दिल्ली के पूर्व कांग्रेस पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद रहे जेपी अग्रवाल, पूर्व मेयर फरहाद सूरी भी मौजूद थे। दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल औप सीएम अरविंद केजरीवाल और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ भी शमशान घाट पहुंचकर अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी।

इससे पहले दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पार्थिव शरीर को कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड में रखा गया था। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी ने शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि दी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी शीला को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सोनिया गांधी ने शीला दीक्षित के निधन पर गहरा दुख जताया। सोनिया ने शीला को अपनी बड़ी बहन और दोस्त बताते हुए कहा कि उनकी कमी पार्टी में हमेशा खलेगी। उन्होंने कहा कि शीला दीक्षित का इस दुनिया से चले जाना कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी क्षति है। वह हमेशा हमें याद आती रहेंगी।
सूत्रों के मुताबिक शीला दीक्षित की शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी से हुई थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस कॉलेज से आर्ट्स में मास्टर्स डिग्री हासिल की। उनकी शादी आईएएस विनोद दीक्षित से हुई, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे।
कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि देने के लिए कई नेता पहुंचे। इसमें सबसे उम्रदराज पूर्व उपप्रधानमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि दी। वहीं, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी रविवार को शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर उनके साथ कई अन्य लोग भी मौजूद रहे। पूर्व विदेश मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने भी शीला दीक्षित को श्रद्धांजलि दिया। इस दौरान उन्होंने शीला दीक्षित के परिजनों से भी मुलाकात की।
भाजपा ने स्थगित किए सभी कार्यक्रम
शीला दीक्षित के निधन का समाचार आते ही दिल्ली भाजपा ने रविवार को होने वाले अपने सभी सार्वजनिक कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा कर दी है। भाजपा नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है। नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि शीला दीक्षित के निधन से हमें काफी दुख हुआ है। हमारे उनसे वैचारिक मतभेद भले रहे हों लेकिन दिल्ली के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
20 जुलाई को पीएम मोदी ने शीला दीक्षित के निधन पर शोक जताते हुए कहा था, “शीला दीक्षित जी के निधन से गहरा दुख हुआ। मिलनसार व्यक्तित्व की धनी शीला दीक्षित ने दिल्ली के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया।”
वहीं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी शीला दीक्षित के निधन पर दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और एक वरिष्ठ राजनेता श्रीमती शीला दीक्षित के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। उनका कार्यकाल राजधानी दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण परिवर्तन का दौर था जिसके लिए उन्हें याद किया जाएगा। उनके परिवार व सहयोगियों के प्रति मेरी शोक-संवेदनाएं।”

शीला दीक्षित का राजनीतिक सफर
शीला दीक्षित 15 साल तक दिल्ली की सत्ता पर काबिज रहीं। इससे पहले 1984 से 89 तक वे कन्नौज (उप्र) से सांसद रहीं। इस दौरान वे लोकसभा की समितियों में रहने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र में महिलाओं के आयोग में भारत की प्रतिनिधि रहीं। उन्होंने राजीव गांधी सरकार में केन्द्रीय मंत्री के रूप में भी कार्य किया था।
शीला दीक्षित 1998 से 2013 तक लगातार 15 साल दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से हारने के बाद शीला दीक्षित ने राजनीति से दूरी बना ली थी। लेकिन लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी की अगुवाई में उन्होंने फिर से दिल्ली की कमान संभाली थी। इस बार के चुनाव में भी वे हार गई थीं। हाल ही में प्रदेश स्तर पर शीला दीक्षित बनाम पीसी चाको के बीच अनबन की खबरें चर्चा में थी।


